Wednesday, December 31, 2008

प्रेम अर्थ ...

सोमेश पारुल का अनन्य प्रेम ..
कुछ नई कहानी कह जाता है ...
माणिक्यों के तेज से सुंदर ...
ये भाव नया बह जाता है |

इस परम पवित्र बंधन का अर्थ ..
है अलौकिक स्वर्ग सा निश्छल ..
कितना स्नेह भरा है इसमें ...
एक नए स्तर पर जैसे वत्सल |

सोमेश भोर की किरण में आए ..
रक्तिम समां ने स्वर्ण बिखेरा ...
पारुल नव कलिका सकुचाई ...
कहते हुए निशब्द का फेरा |

दूब हरीतिमा के तेज को ...
सोमेश ! ने फ़िर संवारा है ..
उस दिवा किरण का भान लिए ...
पारुल का दिल तुम्हारा है !

पुरवाई संग बह चला है ....
सोमेश मचाता शान्ति की हलचल ...
पराग सा स्वर्ण बिखेरा पारुल ने ....
सूर्यमुखी से पल पल हर पल |

स्वर्ण लकीर बन तरंगिणी में ...
इठलाता सोमेश चला है ...
स्वयं को समर्पित करती मन से ...
पारुल हिमाद्रि की वो कला है |

प्रकाश की जगमग अब फैला कर ...
सोमेश जगत में व्याप्त हुआ ...
पारुल ने बन पौध विश्व की ...
कहा तेज पर्याप्त हुआ !!!

सोमेश ने जब बन गर्म हवा ...
फसलों के उद्धार की ठानी ...
पारुल बरस गई बरखा सम ...
एक दिल है एक ही वाणी |

सोमेश पारुल का अमर प्रेम ये ...
अद्भुत त्याग की निशानी ...
रूबी नीलिमा के श्वेत बर्फ कण ...
मिश्रित होकर बनते पानी |

सोमेश ने चातक बन ..सदियों तक ...
पारुल का इन्तजार किया ...
पारुल ने बन बूँद अनोखी ...
मोती सम स्वीकार किया ...
सोमेश प्रेम को अंगीकार किया |

दुआ भी ये है फिजा भी ये है ...
मन की दिल की रजा भी ये है ...
रब निर्मित जोड़ी ये सुहानी ...
सोमेश पारुल की मासूम सी कहानी ...
एक नए युग का आरंभ करे ...
कुछ एसा उद्धरण प्रारम्भ करे ...
जो नव युगल प्रेम का हो प्रतिसाद ...
समस्त देव बरसायें आशीर्वाद |

2 comments:

Anand Shankar said...

ye kavita naa to Somesh aurr na hi Parul ko samajh aaayi hogi..
aisa prateet hota hai maano ye kavita kavi ko sawayam bhi samjh nahi aayii :D

Vaibhav Rikhari said...

he he he ..baat to kuch had tak sahi hai ..jis din kavi swayam ke bhaavon ko pechaan lega us din kavya neeras lagne lagega :P