Wednesday, March 4, 2009

आठ सिद्धांत ...

मैं जानता हूँ लड़कियों के स्वाभाव पर कई शोध किए जा चुके हैं जिनके परिणाम कभी सुखद और कभी दुखद हुए हैं | हर कोई इस क्षेत्र में बिना आलस्य किए खोज करने में लगा रहता है | आज इन्ही सब प्रयासों के चलते हमें कई सिद्धांत मिले हैं किंतु ये सब केवल निम्न आठ सिद्धांतो पर आधारित हैं | ये सिद्धांत मूलभूत सिद्धांत हैं जिनके असंख्य अनुप्रयोग हैं और बाकी समस्त सिद्धांत इन्ही पर आधारित हैं ...

"लड़कियों के मन की थाह लेना असंभव है" ये सबसे ज्यादा प्रसिद्ध और समस्त सिद्धांतो का आधारभूत सिद्धांत है |इस सिद्धांत को ग़लत सिद्ध करने के प्रयास में कई लड़के शहीद हुए हैं | वो समुद्र के अन्दर डूबते चले गए और फ़िर कुछ समय बाद ऊपर निर्जीव तैरते नजर आए | अतः सावधान ! भूलकर भी इस दिशा में क़दम न बढाएं |

"लड़कियों के आंसू और अरब देशों से निकलने वाले तेल में कोई अन्तर नही है " दोनों वस्तुएं दोनों जगह प्रचुर मात्र में उपलब्ध हैं | बिना प्रयास के दोनों का उत्कर्षण हो जाता है | दोनों के लिए ही विश्व को भारी कीमत चुकानी पड़ती है | आंसुओं का उद्देश्य समझना असंभव है (कारण के लिए कृपया प्रथम बिन्दु को देखें) | अतः आपसे अनुरोध है कि रुदन को एक अत्यन्त सामान्य प्रकिर्या समझ कर उस पर ध्यान न दें क्यूंकि ये आंसू कभी भी कहीं भी बिना चेतावनी के निकल सकते हैं |

"लड़कियों की मुस्कराहट पर कुर्बान हो जाने वाले टाइप लड़कों में से केवल १० % लड़कों की मानसिक हालत ठीक बताई जाती है " इस हथियार का प्रयोग प्राचीन काल से होता आया है | कभी विश्वामित्र मेनका का शिकार बने तो कभी असुर मोहिनी का | इस अस्त्र का प्रयोग करके आपको झाडू कि तरह प्रयोग किया जाता है और विडम्बना ये है कि आपको पता भी नही चलता | पुनः हँसी का अर्थ समझ पाना असंभव है (कारण के लिए प्रथम बिन्दु देखें) |
'I love u ' प्रमेय भी इसी सिद्धांत का एक अनुप्रयोग हैं |

"लड़कियों को कोई बात बताना या २६ जनवरी को लाल किले की प्राचीर से भाषण देना तुल्य है (दोनों परिस्थितियों में बात पूरी दुनिया को पता चल जाती है )" वैसे इस सिद्धांत के मूलभूत खोजकर्ता श्री युधिष्ठिर हैं |
सामान्य तौर पर इस घातक लक्षण का शिकार लड़के ही होते हैं जिनकी न जाने कौन कौन सी बातें कहाँ कहाँ पता लग जाती हैं , लेकिन इस सिद्धांत का उपयोग आप कोई बात broadcast करने हेतु भी कर सकते हैं | इसलिए विज्ञानं कि भांति ये आपके हाथ में हैं जैसा उपयोग होगा वैसा परिणाम आएगा |

"लड़का-लड़की अगर साथ खरीदारी करने निकलें तो ९० % खर्चा लड़के को उठाना पड़ता है (इस बात पर विद्वानों में मतभेद है कुछ इसे १००% भी मानते हैं )" इस सिद्धांत को दो भागों में विभक्त किया जा सकता हैं , प्रथम खाने पीने का खर्चा - लड़कियों में सामान्य रूप से ये प्रकृति पायी जाती हैं कि अगर लड़के साथ हैं तो लड़के भुगतान करेंगे (उपरोक्त घटना को अब शिष्टता का नाम दे दिया गया हैं ताकि नैतिकता का चोला पहनाया जा सके) , द्वितीय खरीदारी का खर्चा - इस प्रकार कि परिस्थिति में अक्सर लडकियां जिरह जरूर करती हैं कि पैसो का भुगतान वो करेंगी किंतु 'मैं देती हूँ पैसे ...' 'मैं देती हूँ पैसे ....' करते हुए जब वो अपने भानुमति के पिटारे (Purse) में कुछ खोजने का नाटक करती हैं उस बीच बेचारे लड़के शिष्टतावश भुगतान कर देते हैं | केवल कुछ दिलेर लड़कों की वजह से ही ये अनुपात ९० % ही हैं

"अगर आपके पास साइकिल है तो लड़की बाइक में किसी और के साथ दिखती है , बाइक आती है है तो लड़की कार में किसी और के साथ दिखती है , कार आती है तो लड़की की शादी हो चुकी होती है " ये जीवन चक्र साल दर साल चलता रहता हैं | इसके कई और रूप भी हैं जिनकी व्याख्या करना विषय वस्तु से बाहर हैं | यहाँ पर संदेह उत्पन्न होता हैं कि लड़की किसी के साथ तो बाइक या कार में हैं ही किंतु ये सिद्धांत कायम रहता हैं क्यूंकि जिसके सपने वो बेचारा लड़का कार या बाइक में देखता हैं वो सदा एक क़दम आगे रहती हैं | अब मन को मनाने के लिए आदमी क्या कुछ नही करता !

"कोई भी लड़की किसी भी बात से अनजान नही होती लेकिन उसका दिखावा जरूर करती हैं " इस सिद्धांत की व्याख्या करने की आवश्यकता नहीं हैं क्यूंकि ये ख़ुद में ही परिपूर्ण हैं |

"लडकियां cutie pie और sweetie जैसे शब्दों का अतिशय और ग़लत प्रयोग करती हैं" ये सिद्धांत अभी हाल ही में खोजा गया हैं | उदहारण के लिए उपरोक्त शब्द हर प्रकार के 'कुत्ते के बच्चे के लिए' एवं 'थुलथुले गाल वाली वस्तु के लिए प्रयोग होता हैं | प्रयोग तक ठीक हैं लेकिन जिस प्रकार से इसका प्रयोग होता हैं वो अजीब हैं जैसे लड़कियाँ इस तरह से cutie pie कहते हुए पिल्ले के पीछे भागती हैं की बेचारा पिल्ला घबरा जाता हैं | कुत्तों के समुदाय में उनका इस तरह से शोषण करने के ख़िलाफ़ आक्रोश पनप उठता हैं और इसी लिए वो बड़े होते होते वो अपना cutie pie वाला रूप त्याग देते हैं |

9 comments:

अनिल कान्त : said...

ha ha ha ......bahut rochaka laga

khaskar
"लडकियां cutie pie और sweetie जैसे शब्दों का अतिशय और ग़लत प्रयोग करती हैं"

dhanya ho

Anand Shankar said...

hahaha...bahut badhiya.. :)
kuchh naye siddhaant:

1. ladkiyon ki varta-shakti doorbhaash yantr per dugni ho jaati hai.

2. ladkiyon ke liye achchhe ladke sirf benchmark hote hain. A girl never marries a hotter man! She just hangs out(read uses) with him.

3. ladkiyaan gaana gaane mein bahut bhaav khaati hain. aawaz kauwe/gadhe jaisi ho to bhi!!

Vaibhav Rikhari said...

anil bandhuwar ..sarahana ke liye bahut bahut dhanyawaad ..waise lekhan mein aapka koi jawaab nahi hai ..sadharan shabdon mein pathak ko baandhey rakhna to koi aapse seekhey :-)

aur cheelu ..haan bhai eise aur bhi kai siddhant hain ..doorbhash yantra wala to awesome hai ..inn sabko add karonga main kuch time mein :-)

smily said...

bahut khub bharata shri...
aap ko to Dr. Vaibhav kehna jyada uchit hoga...kyounki aapne to ladkiyo per P.HD. kar li hai....
aur ye sabhi sidhant bahut sahi hai... lagta hai ladkiyo ke bahut prabhav main rahe ho...[:)]

Arpit said...

nice one ...congratulations for entering the domain !!!

किम said...

ha ha ha...ricky tum god ho yaar

cp.jethani said...

very true...

Nandan said...

phod diye rikhari :)

raj shekhar said...

aache sidhant hain bhaiya.. aur bilkul sahi bhi.
mazza aa gaya padh ke.. :)