Monday, November 19, 2012

जज्बात


कुसूर
कुसूर न उनका था न हमारा इस बात पर ...
कि दोनों ही गुलाम थे और खता हो गयी |


याद
तेरी याद में अधर मेरे सिल से गए हैं..
अब हँसता भी हूँ तो दर्द होता है कहीं |

भरोसा 
भरोसा न करें तो फिर क्या करें तू बता ..
खुद से भी कोई गिला करता है भला ?

एक घूँट
हरिवंश जी ने कभी तुझपे फक्र किया था ..
देवदास कभी बस तुझपे जिया था ..
मैं तो ताउम्र के लिए मुरीद बन गया हूँ ..
सकी के हाथ से बस एक घूँट पिया था |
बस एक घूँट पिया था |

शायद


शायद वो हंस गए थे ..
शायद हम फँस गए थे ..
शायद वो इकरार था ..
शायद वो प्यार था ..
शायद हम दूर हैं 
शायद मजबूर हैं ..
शायद कुछ कह सकें अब ..
शायद बस बह सकें अब ..
शायद कुछ कर सकें अब ..
या शायद बस मर सकें अब ?

अल्फ़ाज


मोहब्बत
मोहब्बत चीज ही अलग सी है ..
बस ठन जाती है 
कभी दर्द तो कभी दवा बन जाती है |

VIRUS
VIRUS तो देखा मोहब्बत का 'बेनाम सा'..
न दिखता था ! न बिकता था !
दिलो के बाजार में | 

मोहब्बत
 ये तो मोहब्बत है न !
 इसकी थाह नहीं है ..
वक़्त के पैमाने पर मापने चलो ..
गर दिल में 'आह' नहीं है |
वैसे भी वक़्त के लिए वक़्त निकलने की ..
अब मुझमें चाह नहीं है |

आंसू
तेरी पलकों में दो आंसू हैं दिखते आज मुझे ..
लगता है कहीं तो जलजला आया होगा ..
कहीं तो बरसात हुई होगी |

धर्म और इंसान


धर्म और इंसान का रिश्ता पुराना है ..
बड़ा कौन इस पर यहाँ लड़ता जमाना है !
जब इंसान था तब धर्म नहीं था ..
अब धर्म है पर इन्सां नहीं है ।
अब खुद ही फैसला करो ...
मुझको ये बताना है ..
सदियों से चल रहा ये वो फ़साना है ।

तेल


तेल देखो तेल की धार देखो 
तेल  पर चीन  और ..
अमेरिका की मार देखो ।
तेल से चलती अनोखी कार देखो ।
तेल से बदल रही सरकार देखो ।
तेल से मच रहा हाहाकार देखो ।
तेल से बनता बिगड़ता बाजार देखो ।
तेल से गरीब पर पड़ता भार देखो ।
तेल से होता आदमी बेकार देखो ।
हुक्मरानों कभी तो तेल के पार देखो !
बस रहा उधर भी एक संसार देखो ।

Friday, November 9, 2012

हे प्रिये


एक बात बताओ प्रिये अभी !
वो वृन्दावन की झांकी में ..
जो कलरव था बिसराया सा ..
जो भ्रमर था भरमाया सा |

वो तुम थी या था रूप तुम्हारा ..
चातक का जो बना सहारा ..
जब यौवन की अगन से कहीं ..
बादल बनकर झम झम सावन ..
ऐसे ही फिर बरस गया ..
मन मेरा यूँ ही तरस गया |

फिर बसन्त का जी मिचलाया ..
पराग वर्ण की फैली छाया ..
हंस कर कलियों की बातों को ..
टुकुर टुकुर भंवरा मुस्काया |

हे प्रिये ! तुम्हारा स्वर्ण वर्ण ..
मेरे नैना भी प्यासे हैं ..
रूप की चमक में अंधे हो ..
फिर प्यासे रह जाते हैं |

हे प्रिये ! तुम्हारे अधर रक्त से ..
सने सने क्यूँ लगते हैं  ?
मन करता है छूने का ..
अरमान बहुत से जगते हैं |

हे प्रिये ! तुम्हारे केश सुगन्धित ..
चन्दन का तरु विस्मित हो ज्यूँ ..
बल खाते से उड़ते से हैं ..
चपल तरंगो की बानी क्यूँ ?

हे प्रिये ! कभी तुम हंसती जो जब ..
प्रकृति पुरुष मिल जाते हैं ..
ऊसर धरती के देखो तब  ..
रोम  रोम  खिल  जाते हैं |

हे प्रिये ! तुम्हारा अंग प्रत्यंग  ..
देदीप्त्यमान  सा  क्यूँ लगता  है  ?
क्षितिज में एक तारा  फिर से ..
अंगडाई  ले  ज्यूँ जगता  है ।

हे प्रिये ! मगर ये  भी सच  है कि ..
काया तो बस नश्वर है 
प्रेम मेरा मोहताज नहीं है ..
ये पवित्र है ईश्वर  है ।

हे प्रिये ! अगर तुम जान सको ..
तो जानो कि मैं तुम ही हूँ ..
अस्तित्व मेरा तुममे है बसा ..
खोजो खुद में ..मैं गुम ही हूँ ।

Friday, August 24, 2012

आह्वाहन

कुछ बात जो है तुझमें ..
तो कर के तू दिखा दे ...
मौत का फलसफा ...
हंस के तू सिखा दे |

यूँ दीन बन के क्या तू ..
रोता रहा है हर पल ..
आंसू नहीं हैं जीवन ..
ये बात तू बता दे |

जिन्दा रहा तो क्या है ..
मुर्दा अगर जिगर है ?
वो जोश वो जवानी ..
वो हौसला किधर है ?

सोचने का मौका ..
मिलता बहुत है प्यारे ..
जो कर के तू दिखाये ..
तो ख्वाब सच हों सारे |

परिवार का तराना ..
गर यूँ ही लोग गाते ..
तो होता क्या सिकंदर ?
क्या भगत सिंह आते ?

है देश से मोहब्बत ..
तो मत में तू चले चल ..
जीतना है बोल दे ..
गर राह में मिले पल |

राहू को पकड़ के ..
क़दमों तले झुका दे ..
शनि की जकड के गर्दन ..
हिसाब तू चुका दे |

रेखाएं जो हैं खाली ..
तो चीर के दिखा दे ..
बहा के खूं की धारा ..
नयी किस्मतें बना दे |

हारना तो प्यारे ..
जीत का जनम है ..
मंजिलें है तेरी साथी ..
और रास्ता सनम है |

तो डर के क्यूँ है जीना ?
क्यूँ घूँट दुःख के पीना ?
गुनगुना नया तराना ..
सुने जो ये जमाना ..
वादा जो अब किया है ..
तो खुद से तू निभाना |

सरगम कोई नयी सी ..
अब राह में बजा ले ..
मंजिल मिले या न अब ..
चलने में ही मजा ले|

मरते समय जो तुझको ..
अफ़सोस न हो प्यारे ..
वो जिंदगी तू जी ले ..
एक घूँट ऐसा पी ले |