Friday, August 5, 2011

वो ...

वो अनजाना सा रहता है फूस के मकान में ..
गरीबी में कोई दीवाना नहीं होता ...

आज भी अंधेरों में बीतती है जिंदगी उसकी ..
कोई शमा नहीं होती ..कोई परवाना नहीं होता ..

कोई नहीं बाटता उसकी जोह घर पर आजकल ..
फसल की चिंता में घर जाना नहीं होता ..

जिन घरों में हड्डियां और पीलापन रहा करते हैं ..
उन घरों में किसी का शर्माना नहीं होता ..

बारात गुजरने के बाद पहुँचता है जश्ने महफ़िल में कोई ..
जूठन उठाने को ..उसके घर में दाना नहीं होता ..

कुछ फेंके टुकड़ों को इकठ्ठा कर खुश होता है फिर ..
पता है उसको बच्चों के पास खाना नहीं होता ..

हर रोज उठता है वो जीने की आस लेकर ...
कोई वादा नहीं होता ..कुछ निभाना नहीं होता

सावन में बरसात की आस में जागती दो आँखें ..बालियों के लिए ..
वहाँ कुछ सुहाना नहीं होता ..किसी को कुछ गाना नहीं होता

किसी की लाश को रुखसत करता हुजूम ए आदमजात ...
किसी की लाश के लिए कोई जमाना नहीं होता ..

सपनो की दुनिया में रिझते रिझते खीज गया है वो ..
अब उसे किसी चिराग को पाना नहीं होता ..

कभी ऐसे ही कोई पंक्तियाँ लिख के वाह ले लेता है ..
उसके आंसुओं का क्या ? कोई ठिकाना नहीं होता ..

Friday, July 8, 2011

दर्द

अँधेरा मेरे साथी बन गया दोस्तों ..
कि अब नींद सी आने लगी है |

इंतज़ार किया उनका नशे में पैबस्त होकर ..
कि अब जान सी जाने लगी है |

मैंने काट ली अपनी फसल सूखी यारो ..
कि अब बदरी सी छाने लगी है |

मेरे हंसने की आवाज छीनकर यारो ..
देखो ! आज बेवफा गाने लगी है |

कितने रोजे रख लिए 'चीलू' ने उसके लिए ..
कि वो फिर से निवाले खाने लगी है |

मुझे जख्मो के सूखने का इन्तजार है ..
वो नमक कहीं से लाने लगी है |

Wednesday, July 6, 2011

सत्य वचन

मेरा गिलास मेरी जिंदगी बन गया है दोस्तों ..
ये भी खाली है ..वो भी खाली है |

किस्मत ने कभी हंस कर कभी रो कर मारा मुझे ...
ये भी गाली है ..वो भी गाली है |

शराब पीता नहीं ...हाँ ! वो पीती है मुझे ..
ये भी साली है ...वो भी साली है |

पड़े रहता है दर बदर सरे बाजार 'चीलू' ..
ये भी नाली है ...वो भी नाली है |

एक पंख से ढकी हुई ..एक देखो कटी हुई ..
ये भी डाली है ..वो भी डाली है |

एक बसाता गुलशन ..एक बसाता जीवन ..
ये भी माली है ..वो भी माली है |

उजालों की दो रस्सियाँ खरीदी हैं मैंने मगर ..
ये भी काली है ..वो भी काली है |

UPSC

CUT OFF के नाम से हर शख्स बिक रहा है ..
हर फुलका UPSC के तंदूर में ..
चाहे बिना सिक रहा है |

STOCK EXCHANGE भी शर्मा जाए ..
ऐसे INDEX बदल रहा है ..
FDI कौन है ...FII कौन ?
जानने को हर कोई मचल रहा है |

UPSC तो लेकिन यारो ..
किस्मत की पैबस्त चाबी है ..
कभी तुम्हारी भाभी थी ..
कभी हमारी भाभी है |

इसलिए चिंता मत करो ...
एक गिलास तो होगा न !
उसमें OLD MONK भरो ..
MAINS में तो शहीद होना ही है ..
PRE की चिंता में मत मरो |

PRE MAINS INTERVIEW ...
खेल हैं जिंदगी के ..
तू खिलाडी है शौक़ीन माना !
लेकिन UPSC नमकीन है बावले ..
उसका स्वाद तूने न जाना |

इसलिए बाबा खोपड़ी वाले का मंतर ..
आज तुझे देता हूँ ..
तेरी नियति तू लिखा के लाया है ..
ये सोचवा कर तेरे दुःख लेता हूँ ..
तू कर मेहनत लेकिन ..
उसमें गुरेज नहीं ..
और तू करेगा ही ..
गर तू फरेब नहीं ..

तेरा हुआ तो सोचना मेहनत थी ..
न हुआ तो सोचना किस्मत थी !
बात मेरी मान ..
हो जा महायान ...
खोपड़ी वाले का कर ध्यान ..
एक कश लगा ..रामबाण !

Wednesday, May 4, 2011

प्रार्थना

मैं नहीं माँगता वो मिले ..
जिसको न कभी मैं मिल पाऊं ..
जो भी हो बस इतना देना ..
फूलों के जैसे खिल पाऊं |

जीवन में सुख दुःख आता है ..
मन मेरा घबराता है ..
कभी भोर किरण... कभी निशा चरण ..
व्यर्थ में ये इतराता है ..

इतराहट को दूर करो ..
मन में मेरे शांति भरो ..
जो राह है मेरी निश्चित सी ..
उस पर बरबस चलता जाऊं ..

जीत मिले या हार मिले ..
प्यार मिले या वार मिले ..
समभाव मुझे दाता रखना ..
यही भाव से भर जाऊं
मैं यही भाव से भर जाऊं |

Saturday, April 23, 2011

मेरी रेल

पटरी पर दौड़ती मेरी रेल
जाने कहाँ जा रही है !

एक अनजाने गुलिस्तां में..
भागते से ..दौड़ते से ..तरु ..
और उनके साथ कदमताल करती ..
मेरी रेल ..
जिंदगी के गीत गा रही है ..
जाने कहाँ जा रही है !

कुछ पटरियां अनजान सी ..
मेरी रेल को लालची नजरों से ..
ताकती ..झांकती ..प्रेम से ..
सोचती, नदी के किनारे तो नहीं !
मिलने की आस में गँवा देते अस्तित्व ..
समुन्दर की गोद में |
मेरी रेल जवाब में ..
कुछ कह रही है |
सीटी बजा रही है ...
जाने कहाँ जा रही है !

स्टेशन भी बेगाने से ..
अनजान बन इस्तकबाल करते ..
पर फिर लाल हरी सी कुछ मिठाइयाँ देकर ..
करते नियंत्रित ..पानी की फुहारें भी..
मनुहार करती ..सोचती !
सोचती की मेरी रेल बैठेगी कुछ देर और ..
लेकिन चलना भाग्य में लिखा कर ..
मेरी रेल कहीं से ला रही है |
जाने कहाँ जा रही है !

मेरी रेल के अन्दर देखो ..
देखो ! एक दुनिया बसी है ..
एक बच्चा रो रहा है ..
एक काकी हंस रही है ..
एक गाने वाला पत्थर बजा ..
मांगता है जिंदगी के कुछ और दिन |
और एक पंडित ..पंचांगों की उधेड़बुन में ..
बतला देता की कब लगन ठहरा है ..
और खुश हो जाता एक कुनबा ..
मेरी रेल देखकर इसको न जाने क्यूँ ..
शर्मा रही है ..
जाने कहाँ जा रही है !

मेरी रेल गुजरती है ..
धान के खेतों से ..
बालियाँ कहीं सोना बन चुकी हैं ..
और आते कहीं बीहड़ ..
कहीं रेगिस्तान भी ..
नदियाँ और टूटे मकान भी |
कलोल भी निर्जन भी जिनके बीच ..
उन्मुक्त मेरी रेल ..मुक्त है ..
समभाव है |
निर्वाण की परिभाषा ..छुक छुक करते ..
देखो कैसे समझा रही है |
जाने कहाँ जा रही है !

मेरी रेल देखो भेद नहीं करती ..
राजा या रंक ! अक्षर या अंक !
पहुंचाती सबको है ..गंतव्य पर ..
चढ़ाती सबको है ..मंतव्य पर ..
हाँ देखो सबको चढ़ाती है ..
इंसानों की बस्ती में ..
केवल इंसान को बढाती है |
फिर भी हो जाते हैं कुछ गोधरा लेकिन !
और 'क्यूँ' की खोज में ..
मेरी रेल देखो ..
सो नहीं पा रही है ..
जाने कहाँ जा रही है !

मेरी रेल रात में ..
ठहरी ठहरी बात में ..
अंधेरों को चीरकर ..
निर्जनता को जीतकर ..
बढती रही है आज तक ..
और दम नहीं लेती ..
जब तक की लक्ष्य न मिले ..
और फिर भी रुकने का नाम नहीं !
क्यूंकि नए देश में जाना है ..
नया लक्ष्य बनाना है |
है न हम इंसानों की जिंदगी की तरह ?
शायद यही हमको बता रही है ..
मेरी रेल ...
अपने नए देश की ओर जा रही है |

Monday, March 28, 2011

भारत और इंडिया

मेरा 'भारत' 'इंडिया' को देखता है ..सोचता है ...
साथ ही जन्मे थे दोनों ..
१५ अगस्त की पटरी पर ..
बस लाली नहीं थी खून था ..
उस मैली कुचैली गठरी पर |

मेरा भारत कुछ बड़ा हुआ ..
पोलियो का शिकार बन ..
जैसे तैसे खड़ा हुआ |
आँख उठा उसने देखा ..
भाई की किस्मत की रेखा ...
ने उसको बहुत संवारा है ..
वो माँ का दुलारा है !

मेरा भारत सो जाता है पेट पकड़ ..
क्यूंकि निवालों की दौड़ अजीब होती है .
और दर्द उठता है जब तो रख लेता एक पत्थर ..
पेट पर ...
जैसे वो भरा हो !
और सामने देखता MAC-D के बाहर..
इंडिया डाल कर चला जाता है कुछ बर्गर..
कूड़े के ढेर में ..
जिसे खा जाता है गली का वो कुत्ता ..
जिसके साथ भारत कल रात को सोया था |

मेरे भारत को प्यास भी नहीं लगती ...
उसके गले ने रेगिस्तान में रहना सीख लिया है ..
और जब जान पर बन आती है ...
तो चला जाता है गंगा किनारे जहां ..
इंडिया ने अभी कचरा गिराया है |

मेरा भारत खेती करता है ..
मानसून की आस में पल पल मरता है ..
भाई के यहाँ से आये ख़त में देखता ..
कुछ फोटू जहां..
इंडिया रेन डांस करता है |

मेरा भारत स्कूल नहीं जाता ..पढने के लिए ..
होटल जाता है ..चाय के कुछ प्याले उठाने !
जिसे पीकर अभी अभी इंडिया उठा है ..
आँखें चमक तो जाती हैं मेरे भारत की ..
वो बस्ता ..वो पेंसिल ..वो पानी की बोतल !
देख कर लेकिन सोचता है ..
भीख मांगने का टाइम हो गया !

मेरा भारत बीमार नहीं होता ...
क्यूंकि उसे पता नहीं कि ..
'बीमार न होना' क्या होता है ?
अपने भाई इंडिया के बारे में पढता है..
मेडिकल पर्यटन में एक नम्बरी हो गया है |
फिर निकाल लेता एक हरी गोली ..
जो हर बीमारी में खा कर ..
सोच लेता है मैं ठीक हूँ |

मेरा भारत अंग्रेजी नहीं बोलता ..
मेहनत करना जानता है पर ..
पर उससे क्या होता है ?
इंडिया से मिलने जाता है कभी कभी ..
लेकिन दरवाजे पर ही अंग्रेजी सुन कर ..
ठिठक जाता है ..दुबक जाता है..
एक कोने में !
और देखता है चिल्लाते हुए इंडिया को ..
MAC BOOK में नेट के न चलने पर |
सोचता है अपने घर के बारे में ..
कि उसकी बिजली कब लगेगी ?

मेरा भारत सुनता है ..इंडिया तरक्की कर रहा है ..
मन ही मन कुछ आंकड़ो को देखकर खुश होता .
और सोच लेता कि अब उसे भी कुछ मिलेगा ..
इंडिया भी आश्वस्त कर देता उसे ..
कुछ योजनायें ..परियोजनायें.. हर साल अपनी चला कर |
लेकिन मेरे भारत के पास कागज नहीं है ..
भारत होने का !
और लौट आता वो वापिस अपने फूस के मकान में ..
जिससे बनाकर रस्सी कई बार लटक चूका है वो |