Monday, March 9, 2009

रंग और होली

रंग और लहू में अन्तर नही बचा है ...
कोई भाल पर लगा है ..
कोई भाल पर सजा है ...
एक एक रक्त बूँद छूटती जा रही है ...
और वो कहते हैं, होली आ रही है !!

होली तो था प्रेम का सद्भाव का पुलिंदा ...
धर्म जाति भेद में रहा न भाव जिन्दा ...
आज गले मिलने में भी भय सोच ला रही है ...
और वो कहते हैं , होली आ रही है !!

दहन था उस होलिका का , बदी की जो प्रतीक थी ...
जल में पाप धुलते थे तब ..होली की ये सीख थी ...
आज हाय ! अग्नि ये क्यूँ प्रहलाद को जला रही है ... ?
और वो कहते हैं , होली आ रही है !!

कुछ गीत हो रहे हैं ? या ये मेरा भ्रम है ...
क्रंदन हो रहा चहुँ ओर ..ये तो सिर्फ़ तम है ...
आशा भी मर चुकी है अब जिंदगी सता रही है ...
और वो कहते हैं , होली आ रही है !!

Wednesday, March 4, 2009

आठ सिद्धांत ...

मैं जानता हूँ लड़कियों के स्वाभाव पर कई शोध किए जा चुके हैं जिनके परिणाम कभी सुखद और कभी दुखद हुए हैं | हर कोई इस क्षेत्र में बिना आलस्य किए खोज करने में लगा रहता है | आज इन्ही सब प्रयासों के चलते हमें कई सिद्धांत मिले हैं किंतु ये सब केवल निम्न आठ सिद्धांतो पर आधारित हैं | ये सिद्धांत मूलभूत सिद्धांत हैं जिनके असंख्य अनुप्रयोग हैं और बाकी समस्त सिद्धांत इन्ही पर आधारित हैं ...

"लड़कियों के मन की थाह लेना असंभव है" ये सबसे ज्यादा प्रसिद्ध और समस्त सिद्धांतो का आधारभूत सिद्धांत है |इस सिद्धांत को ग़लत सिद्ध करने के प्रयास में कई लड़के शहीद हुए हैं | वो समुद्र के अन्दर डूबते चले गए और फ़िर कुछ समय बाद ऊपर निर्जीव तैरते नजर आए | अतः सावधान ! भूलकर भी इस दिशा में क़दम न बढाएं |

"लड़कियों के आंसू और अरब देशों से निकलने वाले तेल में कोई अन्तर नही है " दोनों वस्तुएं दोनों जगह प्रचुर मात्र में उपलब्ध हैं | बिना प्रयास के दोनों का उत्कर्षण हो जाता है | दोनों के लिए ही विश्व को भारी कीमत चुकानी पड़ती है | आंसुओं का उद्देश्य समझना असंभव है (कारण के लिए कृपया प्रथम बिन्दु को देखें) | अतः आपसे अनुरोध है कि रुदन को एक अत्यन्त सामान्य प्रकिर्या समझ कर उस पर ध्यान न दें क्यूंकि ये आंसू कभी भी कहीं भी बिना चेतावनी के निकल सकते हैं |

"लड़कियों की मुस्कराहट पर कुर्बान हो जाने वाले टाइप लड़कों में से केवल १० % लड़कों की मानसिक हालत ठीक बताई जाती है " इस हथियार का प्रयोग प्राचीन काल से होता आया है | कभी विश्वामित्र मेनका का शिकार बने तो कभी असुर मोहिनी का | इस अस्त्र का प्रयोग करके आपको झाडू कि तरह प्रयोग किया जाता है और विडम्बना ये है कि आपको पता भी नही चलता | पुनः हँसी का अर्थ समझ पाना असंभव है (कारण के लिए प्रथम बिन्दु देखें) |
'I love u ' प्रमेय भी इसी सिद्धांत का एक अनुप्रयोग हैं |

"लड़कियों को कोई बात बताना या २६ जनवरी को लाल किले की प्राचीर से भाषण देना तुल्य है (दोनों परिस्थितियों में बात पूरी दुनिया को पता चल जाती है )" वैसे इस सिद्धांत के मूलभूत खोजकर्ता श्री युधिष्ठिर हैं |
सामान्य तौर पर इस घातक लक्षण का शिकार लड़के ही होते हैं जिनकी न जाने कौन कौन सी बातें कहाँ कहाँ पता लग जाती हैं , लेकिन इस सिद्धांत का उपयोग आप कोई बात broadcast करने हेतु भी कर सकते हैं | इसलिए विज्ञानं कि भांति ये आपके हाथ में हैं जैसा उपयोग होगा वैसा परिणाम आएगा |

"लड़का-लड़की अगर साथ खरीदारी करने निकलें तो ९० % खर्चा लड़के को उठाना पड़ता है (इस बात पर विद्वानों में मतभेद है कुछ इसे १००% भी मानते हैं )" इस सिद्धांत को दो भागों में विभक्त किया जा सकता हैं , प्रथम खाने पीने का खर्चा - लड़कियों में सामान्य रूप से ये प्रकृति पायी जाती हैं कि अगर लड़के साथ हैं तो लड़के भुगतान करेंगे (उपरोक्त घटना को अब शिष्टता का नाम दे दिया गया हैं ताकि नैतिकता का चोला पहनाया जा सके) , द्वितीय खरीदारी का खर्चा - इस प्रकार कि परिस्थिति में अक्सर लडकियां जिरह जरूर करती हैं कि पैसो का भुगतान वो करेंगी किंतु 'मैं देती हूँ पैसे ...' 'मैं देती हूँ पैसे ....' करते हुए जब वो अपने भानुमति के पिटारे (Purse) में कुछ खोजने का नाटक करती हैं उस बीच बेचारे लड़के शिष्टतावश भुगतान कर देते हैं | केवल कुछ दिलेर लड़कों की वजह से ही ये अनुपात ९० % ही हैं

"अगर आपके पास साइकिल है तो लड़की बाइक में किसी और के साथ दिखती है , बाइक आती है है तो लड़की कार में किसी और के साथ दिखती है , कार आती है तो लड़की की शादी हो चुकी होती है " ये जीवन चक्र साल दर साल चलता रहता हैं | इसके कई और रूप भी हैं जिनकी व्याख्या करना विषय वस्तु से बाहर हैं | यहाँ पर संदेह उत्पन्न होता हैं कि लड़की किसी के साथ तो बाइक या कार में हैं ही किंतु ये सिद्धांत कायम रहता हैं क्यूंकि जिसके सपने वो बेचारा लड़का कार या बाइक में देखता हैं वो सदा एक क़दम आगे रहती हैं | अब मन को मनाने के लिए आदमी क्या कुछ नही करता !

"कोई भी लड़की किसी भी बात से अनजान नही होती लेकिन उसका दिखावा जरूर करती हैं " इस सिद्धांत की व्याख्या करने की आवश्यकता नहीं हैं क्यूंकि ये ख़ुद में ही परिपूर्ण हैं |

"लडकियां cutie pie और sweetie जैसे शब्दों का अतिशय और ग़लत प्रयोग करती हैं" ये सिद्धांत अभी हाल ही में खोजा गया हैं | उदहारण के लिए उपरोक्त शब्द हर प्रकार के 'कुत्ते के बच्चे के लिए' एवं 'थुलथुले गाल वाली वस्तु के लिए प्रयोग होता हैं | प्रयोग तक ठीक हैं लेकिन जिस प्रकार से इसका प्रयोग होता हैं वो अजीब हैं जैसे लड़कियाँ इस तरह से cutie pie कहते हुए पिल्ले के पीछे भागती हैं की बेचारा पिल्ला घबरा जाता हैं | कुत्तों के समुदाय में उनका इस तरह से शोषण करने के ख़िलाफ़ आक्रोश पनप उठता हैं और इसी लिए वो बड़े होते होते वो अपना cutie pie वाला रूप त्याग देते हैं |

हवा

कल सुबह जागने के बाद अलसाई आँखें लिए जैसे ही मैंने दरवाजा खोला सामने किसी को खडा पाया | वो टुकुर टुकुर मुझे निहार रही थी | मैंने आँखें भींच कर उससे विलग होने का प्रयास किया लेकिन मन से उसे हटा नहीं पाया, एहसास से उसे मिटा नहीं पाया | हार कर मैंने आँखें खोली और तभी मुझे ध्यान आया की इसे तो मैंने कल भी देखा है ..परसों भी ...उससे पहले भी ... | पहली बात उसे कब देखा ये सोच नहीं पाया ! वो अभी भी मुस्कुरा रही थी | उसकी आँखों में अजीब सा सुकून था | अचानक उसने मुझे धीरे से छू लिया | मैं चौंक गया ..घबरा गया ..लेकिन अगले ही पल इक कोमल स्पर्श का शीतल अनुभव हुआ | एसा लगा जैसे असंख्य पंख बिना मेरी इच्छा के पूरी शिद्दत के साथ मनुहार कर रहे हैं और मैं मदहोश हो बस उस दिव्य तरंगिनी में बहता चला जा रहा हूँ | डरते हुए मैंने भी उसकी ओर हाथ बढाया लेकिन उसे छू न पाया बस इक स्वर्गिक आनंद का अभी भी अनुभव हो रहा था |