Monday, December 31, 2012

नव वर्ष

एक और गया है साल पुराना ..
मदहोश हुआ है फिर ये जमाना ..
वादे किये होंगे तुमने भी ..
उनको प्यारो भूल न जाना ।

वर्षों की मोहताज जिंदगी ..
रुक रुक कर यूँ चलती है ..
कभी हैं मिलते दलदल दुःख के ..
कभी बहारें मिलती हैं ।

साल बदलते जाते हैं ..
मनु भी चलता जाता है ..
समय भी बस कुलांचे भरता ..
वापिस कभी न आता है ।

कुछ यादें बनती जाती है ..
कुछ सपने मरते जाते हैं ..
पंख लगा के आशाओं के 
हम सब चलते जाते हैं ।

अपना तो बस कर्म यही है ..
जीवन का बस मर्म यही है ..
जीते रहे अभी तक ऐसे ..
सोचो तो बस धर्म यही है ।

मेरी इच्छा है मुकुटमणि अब ..
इंसानों सा जीना सीखे ..
अमृत हो या विष हलाहल ..
एक भाव से पीना सीखे ।

मेरी इच्छा है सम हो जाऊं ..
विशाल बनूँ तो कम हो जाऊं ..
शीत में दूं मैं ताप सुखद वो ..
सूखे में कुछ नम हो जाऊं ।

मेरी इच्छा तुम सब भी हो ..
प्रिय मेरे तुम अब भी हो ..
सपनो को साकार करो तुम ..
निरीह बुतों में प्राण भरो तुम ।

तुम सब गर खुश हो जाओगे ..
नींद चैन की सो पाओगे ..
तो मैं समझूंगा की मेरा ..
नया साल अब आया है ..

जब तुम खुशियाँ बाँटोगे ..
और जब तुम आँसू पॊछोगे ..
तो मैं समझूंगा धरती पर ..
नया स्वर्ग वो लाया है ।

नव वर्ष की शुभकामनाएं ।

Saturday, December 29, 2012

श्रद्धांजलि


ये कविता उस बहादुर लड़की को समर्पित है जिसने आज अपने जीवन की अंतिम सांस ली है । उसकी आत्मा की शांति के लिए और इस दुनिया में इंसानियत को फिर से वापिस लाने के लिए आइये मिलकर प्रार्थना करें ।

प्रथम भाग ..
काली अंधियारी रातें हैं 
हर ऒर सिसकती सांसें हैं ..
वो देखो घर फिर उजड़ गया ..
तिनका तिनका वो बिखर गया ।

ये मंद हवा तूफ़ान बनी ..
चलते चलते वो भटक गयी ..
उस फूल ने लड़ना चाहा पर ..
ये बात ही उसको खटक गयी ..

उस पुष्प का मर्दन मान हुआ ..
तूफ़ान को फिर अभिमान हुआ ..
वो पुष्प लड़ा जीवन के लिए ..
जीवन लेकिन वो हार गया ..
वो उस अनंत के पार गया ..

द्वितीय भाग ...
जहां सब कुछ सुन्दर अच्छा है ..
जहां हर दिल मधुरिम सच्चा है .
जहां नए पुष्प भी  खिलते हैं ..
जहां बिछड़े फिर से मिलते हैं ।

जहां कोई दरिंदा कहीं नहीं ..
जहां गंगा फिर से शुद्ध बही ..
जहां मुस्कानों को मोल मिले ..
जहां खुशियाँ भी अनमोल मिले ।

जहां धर्म नस्ल और जात नहीं ..
जहां अँधेरी ये रात नहीं ..
जहां कोयल अभी भी गाती है 
माँ हर पल लोरी सुनाती  है ।

जहां बड़ा कोई न छोटा है ..
जहां निर्बल कोई न होता है ..
जहां मोर पंख फैलाता है ..
और सुन्दर नाच दिखाता है ..

जहाँ बंसी कान्हा बजाता है ..
जहां राम वचन को निभाता है ..
जहां रावण भी बस ज्ञानी है ..
जहां दुःख बस एक कहानी है ।

तृतीय भाग ..
अच्छा हुआ तू चला गया ..
ये दुनिया तेरे योग्य नहीं ..
ये फिजा बड़ी जहरीली है ..
कुछ भी तेरे भोग्य नहीं ।

तेरे जैसे लाखों पुष्प यहाँ ..
रोज सिसकियाँ भरते हैं ..
पंखुड़ियां हिलती हैं बेबस  ..
रोज रोज वो मरते हैं ।

यहाँ मानव नहीं हैं दानव हैं ..
जो अट्टाहस बस करते हैं ..
तेरे रक्षक बैठे कोनो में ...
काला मुख करके डरते हैं ।

तुझमें लड़ने की हिम्मत तो थी ..
यहाँ तो सारे कायर हैं ..
तू देख रहा होगा उस जग से ..
बिना लड़े ही घायल हैं ।

ये तेरा दुःख तो मनाएंगे ..
ये तुझको तुझ पे चढ़ाएंगे ...
ये बातें बड़ी करेंगे अब ..
फिर तुझको यूँ ही भुलायेंगे ।

अंतिम भाग ..
मेरा तुझसे ये वादा है ..
माली बन तुझको सींचूँगा ..
जिस डाली से तू अलग हुआ ..
उस डाली को मैं खींचूंगा ..

उस ओर जहां पर सूर्य नया ..
तेरे ऊपर फिर से चमक उठे ..
एक बीज नया भ्रमर ले आये ..
तेरा चेहरा फिर से दमक उठे ।

जब तक मेरी सांस चलेगी ..
मैं  वचन निभाऊंगा ..
और तुझसे मिलने पर उस जग में ..
यही गीत मैं गाऊंगा ..
हाँ यही गीत मैं गाऊंगा ।

Monday, December 24, 2012

बलात्कार


बलात्कार का मौसम है ..
देश मेरा  AWESOME है ..
देखो किसको मिली जीत  ?
किसको मिली हार !
किसको चढ़ाया सर ?
किसका हुआ बलात्कार ?

राजनेता दिन दहाड़े यहाँ ..
रोज मेरे देश को नोचते हैं ..
जख्मी पड़ा मेरा देश सामने ..
भ्रष्टाचार करते बलात्कारी ..
कहाँ कुछ सोचते हैं !

मीडिया भी कर रहा बलात्कार ..
लोगों की भावनाओं का ..
फिर देख रहा हंसकर ..
ले रहा पैसे भी ..
कपड़े उतारती निगाहों का !

मेरे देश के युवा की संवेदनशीलता ..
आज STATUS MESSAGE से ..
होती है निर्धारित !
मोमबत्ती जलाने जाता तो है ..
मन में लेकिन बलात्कार का विधेयक ..
बहुमत से कर देता पारित । 

इंसान ही नहीं !!
मानसून भी कर रहा बलात्कार ..
कुछ चंद अनजाने किसानों का ..
उनके लिए सडकें सूनी हैं ..
ग़ायब है हुजूम दीवानों का ।

आम आदमी का भी तो रोज बलात्कार होता है ..
मजबूरी में वो कभी अधिकारियों , कभी दबंगों ..
और कभी राजनेताओं के साथ सोता है ।
फिर जाता है मदद मांगने वर्दी से ..
और वहां फ़िर उसका बलात्कार होता है ।

और न्याय का मंदिर तो ..
सदियों से बलात्कारी रहा है ..
कई सालों बाद चीख निकलती है किसी की ..
पता भी नहीं चलता की किसने कहा है !

और आज फिर से ..
एक औरत का हुआ है बलात्कार ..
पूरा देश खड़ा होकर कर रहा चीत्कार ।
अच्छा है इस बहाने कहीं थोड़ी ..
मानवता तो जागी है ..
बस याद ये रखना है कि मेरे देश में ..
वो अकेले नहीं अभागी है !

बलात्कार मीडिया बस दिखाए तो ही  ..
बलात्कार नहीं होता !
और ये सच है अगर तो इस देश में तो  ..
स्त्री का सम्मान नहीं खोता !

अमीर की इज्जत का कर रहे सम्मान ..
और गरीब की इज्जत को कर रहे बदनाम ..
तो हम भी बलात्कारी हैं ..
अपने खोखले आदर्शों के !
जितनी जिंदगी जी हमने ..
उन तमाम वर्षों के ।

और केवल तन का बलात्कार नहीं होता ..
मन का भी बलात्कार होता है ..
कभी लिंग बदल के अपना देखो ..
कैसा भयावह चीत्कार होता है ।

मुझे बस एक वादा दे दो ..
इन सब बलात्कारों के लिए लड़ोगे ..
सारे बलात्कारियों को चढाओगे फांसी ..
किसी से नहीं डरोगे !

आज अगर तुम नहीं उठे तो ..
भूखे कुत्ते हैं तैयार ..
और फिर कभी खबर बनेगी ..
तुम्हारा भी हुआ बलात्कार !!!!!

Thursday, December 13, 2012

घुटन


मैं ख्वाब अकेले बुनता हूँ ..
मेरा अपना ही धागा है ..
मेरी चादर भी है अलग थलग ..
मेरा अपना ही प्यादा है ।

मुझे पार समुन्दर जाना है ..
मुझे घर वो नया बसाना है ..
मैं वादों का मोहताज नहीं  ..
न मुझको कुछ भी निभाना है ।

मेरी दुनिया अलग थलग सी है ..
मेरे सपने नये नये से हैं ..
न तुम समझे न वो समझे ..
जो आंसू गये गये से हैं ।

रीत अनोखी इस दुनिया की ..
चेहरों का बाजार लगा है ..
चप्पू चला रहा है पागल ..
कौन है वो जो पार लगा है ?

घुट घुट कर जीता है तू भी ..
पता नहीं खुश कैसे है !
दिल तेरा है हँसता रोता ..
 तू तो मुखौटे जैसे है । 

मुझे अविरल धारा बनना है ..
जो बह जाऊं उस ओर कहीं ..
कोई बाँध सामने मत लाना ..
मेरी अपनी है भोर कहीं ।

और जो तुम मुझको बाँधोगे ..
तो मैं बिखरूँगा बिखराऊंगा ..
फिर तुम भी इक दिन टूटोगे ...
मैं उसी राह पर जाऊँगा ।

मुझको रिश्तों से मोह नहीं ..
यहाँ सभी स्वार्थ के मारे हैं ..
निःस्वार्थ प्रेम बस शब्द निरा है ..
इस पर सब जीवन हारे हैं ।

मैं कैसे ऐसे जी लूं जब ..
जीना हर पल का मरना है ..
मैं अपने में ही खुश हूँ मुझको ..
अपना ही कुछ करना है ।

मेरी बातें तुम समझ सको तो ..
कष्ट से तुम भी बच जाओगे ..
जिस घर में तुम साँस ले सको ..
ऐसे घर में तुम आओगे ।

और अगर ये व्यर्थ लगे तो ..
मुर्दा बनकर जीते रहना ..
एक एक घूँट उस कड़वे सच का ..
मरते दम तक पीते रहना ।

Tuesday, December 11, 2012

इस्कूल


भविष्य के उस भारत को  ..
सरकारें लुभाती देखो ..
योजनाओं के अखाड़े में ..
कैसे उसे लड़ाती देखो !

पढ़ना सीमित हो गया ..
नामांकन अनुपातों के ढेर में ..
सरकार खुश हो गयी ..
आंकड़ों के फेर में ।

स्कूलों में अब खाना मिल रहा है ..
कंकड़ वाला ! पर परवाह किसे ?
शिक्षाओं की सैलरी बढ़ गयी ..
अब पढ़ाने की चाह किसे ?

समाज के सारे ठेकेदारों में ..
बंदरबांट चल रही है ..
शिक्षा का मंदिर खतरे में है ..
पैसों की सांठ गाँठ चल रही है ।

शिक्षा का पैमाना बस ..
स्कूल आने तक सिमट गया है ..
ज्ञान का मतलब अब ...
किताबों से मिट गया है ।

लड़ाई अब कार्टूनों को लेकर होती है ..
इस पर नहीं की ....
कार्टूनों को कोई देख रहा है या नहीं !
फेंक रही सरकारें कुछ कच्चे टुकड़े ..
देखती नहीं की ..उनको पकाने के लिये
कोई सेंक रहा है या नहीं !

शिक्षक शिक्षा के अलावा और ..
सब कुछ कर रहे हैं ।
जो जा रहे हैं स्कूल ..उनके घरों में ..
कुछ लोग भूखे मर रहे हैं ।

ये गरीबी है दुश्मन ?
या आदत है दोषी !
जो घर में हो बरकत ..
न समझे पडोसी ।

मगर क्या गुनाह है  ?
उस बस्ते का लेकिन !
जो सदियों से ऐसे ..
फटा जा रहा है ।

वो नन्ही सी पेन्सिल ..
नए ख्वाब लिखना ..
कब से है भूली !
सिमट सी गयी है ।

उन आँखों के सपने ..
मर से गए हैं ..
उनींदी सी पलकों में ..
डर से गये हैं ।

एक चादर हो कोई ..
जो आशा की इस पल ..
ले आओ और आकर ..
इनको ओढ़ा दो ।

ये पलकों के मोती है ..
मोती रहेंगे ..
जो  देना हो वादा ..
तो वो तुम मुझे दो ।

Monday, November 19, 2012

तन्हाई


आलम
आज तक जुदाई का आलम समझ में न आया ..
उन्होंने भी पूछा "क्या बात है ?"
हमने भी पूछा "क्या बात है ?" 

लब्ज 
आज जी करता है अपने लब्ज नाम कर दूं तेरे ...
तू दिल में उतरते रहना तू दिल में बिखरते रहना |

तासीर 
मैं प्यार हूँ ! पर मेरी तासीर अजीब है ..
पल में आबाद कर दूं 
पल में बर्बाद कर दूं |

बारिश 
कल फूलों कि बारिश हुई थी शहरे वतन में ..
सुना है तू जी भर के खिलखिलाई थी |

बादशाह 
बेनाम बादशाह की तरह आ गए दरबार में 
पर सुबह नहीं बस रात होती है मेरे देश में !

तन्हाई 
ये सुबह भी कैसी अजीब है ! शाम की तन्हाई सी ..
वो ओस के साथ खिली है देखो कली घबराई सी |

गजल 
तू गजल है मेरी,  यकीन न हो तो देख !
हर पैंतरे पर महफ़िलें ताली बजाती है | 

महफ़िलें 
मेरी दोस्ती की कसम है तुझे मेरी याद रखना ..
महफ़िलें फिर से जमेंगी गजलें लेकिन आबाद रखना |

चांदनी 
कल अमावस थी पर चांदनी सी छायी थी ..
चाँद बन कर जो तू छत पर आई थी |

सादगी


दर्द 
ये दर्द ऐसा है जो बयाँ नहीं होता ..
सूखा पत्ता है वो कभी जवाँ नहीं होता |

 अकेले
आसमां पर जाकर भी कभी तेरे आगोश में होते थे ..
आज धरती पर हैं और देख ! कितने अकेले हैं |

इश्क 
बाजारों में बिकने वाली चीज गर इश्क होती ..
तो कौड़ियों के भाव बिक जाते  उसके लिए |

नजर 
लोग कहते हैं कि उसकी आँखों में जादू है ..
मुझे तो बस मैं नजर आता हूँ |

रूह 
वो परदे में था, हुस्न का सरताज सा ..
वो फिजा में था , रूह की आवाज सा ..

इल्जाम 
धोखा देने का इल्जाम मुझ पर भी है ..
खुद को बर्बाद किया है सजा क्या होगी ?

कविता 
उसने कहा था मुझे एक कविता बनाने को ..
मैंने हौले से कहा "तुम्ही कविता हो |" 

सादगी 
आज भी हुस्न मदमस्त हो बरसता है बाजार में ..
पर तेरी सादगी खोजता हूँ वो ही नहीं मिलती |

तसवीर


 तसवीर
रह रह के आज भी इन आँखों में इन बातों में ..
तेरी तसवीर वो जादू वाली बना करती है |

खता 
तेरी गोद में कभी सर रखके सोये थे ..
और कभी काँधे पर तेरे जी भर के रोये थे ..
एक पौधा रोपा था हमने आशियाँ बनाने को ..
क्या पता था कि हमने बबूल के पेड़ बोये थे !


बारिश
आज बारिश की उम्मीद तो न थी ..
तू यूँ ही बरस गयी !


बेपर्दा
तू परदे में रह के भी क्यूँ बेपर्दा है ?
आँखों का सुरूर है ..
या हुस्न का कुसूर है ?


कुर्बां 
दो चीजों पर खुदा कसम हम कुर्बां है ,
एक तेरी मदहोशी है ..एक तेरी ख़ामोशी है |

पागल
कल शाम का वक़्त था और तेरी आवाज सुनी थी ,
लोग पागल कह रहे थे तू दिल में बसी थी |

इन्तजार 
बड़ी देर से  रूबरू होने के इन्तजार में ..
जाम अधरों से लगा बैठे हैं तेरे प्यार में |

लब्ज


अक्स

अपनी परछाई में कभी तेरा अक्स देख लेता हूँ ..
सोचता हूँ कि कहीं मैं ..तू या तू ..मैं तो नहीं ?

भाव 
मुझे ठुकरा कर तू मुड़ जाती है उधर ..
जरुर छुप छुप कर रोती होगी मेरी तरह |

क़त्ल
तेरे रूबरू हूँ तो जिन्दा हूँ अब तक ..
किसी ने तो क़त्ल की उम्मीद की थी | 

आवाज 
हम दोनों बेजुबाँ से कुछ कह न सके ..
वक़्त कम था सितमगर सह न सके |

कैदी 
सोचते थे हम भी कि पंछी बन उड़ेंगे जहां में ..
तेरी एक नजर ने मगर देख कैदी बना दिया |

दिवाली
शरमा के तूने कभी पलकें वो झुकाई थी ..
खुदा कसम ! मेरी पहली दिवाली तभी आई थी |

जज्बात


कुसूर
कुसूर न उनका था न हमारा इस बात पर ...
कि दोनों ही गुलाम थे और खता हो गयी |


याद
तेरी याद में अधर मेरे सिल से गए हैं..
अब हँसता भी हूँ तो दर्द होता है कहीं |

भरोसा 
भरोसा न करें तो फिर क्या करें तू बता ..
खुद से भी कोई गिला करता है भला ?

एक घूँट
हरिवंश जी ने कभी तुझपे फक्र किया था ..
देवदास कभी बस तुझपे जिया था ..
मैं तो ताउम्र के लिए मुरीद बन गया हूँ ..
सकी के हाथ से बस एक घूँट पिया था |
बस एक घूँट पिया था |

शायद


शायद वो हंस गए थे ..
शायद हम फँस गए थे ..
शायद वो इकरार था ..
शायद वो प्यार था ..
शायद हम दूर हैं 
शायद मजबूर हैं ..
शायद कुछ कह सकें अब ..
शायद बस बह सकें अब ..
शायद कुछ कर सकें अब ..
या शायद बस मर सकें अब ?

अल्फ़ाज


मोहब्बत
मोहब्बत चीज ही अलग सी है ..
बस ठन जाती है 
कभी दर्द तो कभी दवा बन जाती है |

VIRUS
VIRUS तो देखा मोहब्बत का 'बेनाम सा'..
न दिखता था ! न बिकता था !
दिलो के बाजार में | 

मोहब्बत
 ये तो मोहब्बत है न !
 इसकी थाह नहीं है ..
वक़्त के पैमाने पर मापने चलो ..
गर दिल में 'आह' नहीं है |
वैसे भी वक़्त के लिए वक़्त निकलने की ..
अब मुझमें चाह नहीं है |

आंसू
तेरी पलकों में दो आंसू हैं दिखते आज मुझे ..
लगता है कहीं तो जलजला आया होगा ..
कहीं तो बरसात हुई होगी |

धर्म और इंसान


धर्म और इंसान का रिश्ता पुराना है ..
बड़ा कौन इस पर यहाँ लड़ता जमाना है !
जब इंसान था तब धर्म नहीं था ..
अब धर्म है पर इन्सां नहीं है ।
अब खुद ही फैसला करो ...
मुझको ये बताना है ..
सदियों से चल रहा ये वो फ़साना है ।

तेल


तेल देखो तेल की धार देखो 
तेल  पर चीन  और ..
अमेरिका की मार देखो ।
तेल से चलती अनोखी कार देखो ।
तेल से बदल रही सरकार देखो ।
तेल से मच रहा हाहाकार देखो ।
तेल से बनता बिगड़ता बाजार देखो ।
तेल से गरीब पर पड़ता भार देखो ।
तेल से होता आदमी बेकार देखो ।
हुक्मरानों कभी तो तेल के पार देखो !
बस रहा उधर भी एक संसार देखो ।

Friday, November 9, 2012

हे प्रिये


एक बात बताओ प्रिये अभी !
वो वृन्दावन की झांकी में ..
जो कलरव था बिसराया सा ..
जो भ्रमर था भरमाया सा |

वो तुम थी या था रूप तुम्हारा ..
चातक का जो बना सहारा ..
जब यौवन की अगन से कहीं ..
बादल बनकर झम झम सावन ..
ऐसे ही फिर बरस गया ..
मन मेरा यूँ ही तरस गया |

फिर बसन्त का जी मिचलाया ..
पराग वर्ण की फैली छाया ..
हंस कर कलियों की बातों को ..
टुकुर टुकुर भंवरा मुस्काया |

हे प्रिये ! तुम्हारा स्वर्ण वर्ण ..
मेरे नैना भी प्यासे हैं ..
रूप की चमक में अंधे हो ..
फिर प्यासे रह जाते हैं |

हे प्रिये ! तुम्हारे अधर रक्त से ..
सने सने क्यूँ लगते हैं  ?
मन करता है छूने का ..
अरमान बहुत से जगते हैं |

हे प्रिये ! तुम्हारे केश सुगन्धित ..
चन्दन का तरु विस्मित हो ज्यूँ ..
बल खाते से उड़ते से हैं ..
चपल तरंगो की बानी क्यूँ ?

हे प्रिये ! कभी तुम हंसती जो जब ..
प्रकृति पुरुष मिल जाते हैं ..
ऊसर धरती के देखो तब  ..
रोम  रोम  खिल  जाते हैं |

हे प्रिये ! तुम्हारा अंग प्रत्यंग  ..
देदीप्त्यमान  सा  क्यूँ लगता  है  ?
क्षितिज में एक तारा  फिर से ..
अंगडाई  ले  ज्यूँ जगता  है ।

हे प्रिये ! मगर ये  भी सच  है कि ..
काया तो बस नश्वर है 
प्रेम मेरा मोहताज नहीं है ..
ये पवित्र है ईश्वर  है ।

हे प्रिये ! अगर तुम जान सको ..
तो जानो कि मैं तुम ही हूँ ..
अस्तित्व मेरा तुममे है बसा ..
खोजो खुद में ..मैं गुम ही हूँ ।

Friday, August 24, 2012

आह्वाहन

कुछ बात जो है तुझमें ..
तो कर के तू दिखा दे ...
मौत का फलसफा ...
हंस के तू सिखा दे |

यूँ दीन बन के क्या तू ..
रोता रहा है हर पल ..
आंसू नहीं हैं जीवन ..
ये बात तू बता दे |

जिन्दा रहा तो क्या है ..
मुर्दा अगर जिगर है ?
वो जोश वो जवानी ..
वो हौसला किधर है ?

सोचने का मौका ..
मिलता बहुत है प्यारे ..
जो कर के तू दिखाये ..
तो ख्वाब सच हों सारे |

परिवार का तराना ..
गर यूँ ही लोग गाते ..
तो होता क्या सिकंदर ?
क्या भगत सिंह आते ?

है देश से मोहब्बत ..
तो मत में तू चले चल ..
जीतना है बोल दे ..
गर राह में मिले पल |

राहू को पकड़ के ..
क़दमों तले झुका दे ..
शनि की जकड के गर्दन ..
हिसाब तू चुका दे |

रेखाएं जो हैं खाली ..
तो चीर के दिखा दे ..
बहा के खूं की धारा ..
नयी किस्मतें बना दे |

हारना तो प्यारे ..
जीत का जनम है ..
मंजिलें है तेरी साथी ..
और रास्ता सनम है |

तो डर के क्यूँ है जीना ?
क्यूँ घूँट दुःख के पीना ?
गुनगुना नया तराना ..
सुने जो ये जमाना ..
वादा जो अब किया है ..
तो खुद से तू निभाना |

सरगम कोई नयी सी ..
अब राह में बजा ले ..
मंजिल मिले या न अब ..
चलने में ही मजा ले|

मरते समय जो तुझको ..
अफ़सोस न हो प्यारे ..
वो जिंदगी तू जी ले ..
एक घूँट ऐसा पी ले |

Monday, July 30, 2012

औरत ...


जब तक मैं कार के विज्ञापन में सामने परोसी जाउंगी ...
जब तक मैं सिगरेट के विज्ञापन में नग्न नजर आउंगी ..

जब तक मुझे बस सजने वाली गुडिया समझा जाएगा ...
जब तक मुझे घर से स्टेशन छोड़ने कोई पुरुष आएगा ...

जब तक मैं बस  राजनीति का प्यादा बनकर रहूंगी  ..
जब तक मैं  बस 'कैसी लग रही हूँ' चुपके से कहूँगी ...

जब तक मुझे बस बेटी, बहिन और माँ समझा जाएगा ...
जब तक TV पर FAIR AND LOVELY का चेहरा आएगा ..

जब तक मैं पुरुषों के बीच गालियों का हिस्सा रहूंगी ...
जब तक मैं नीला चेहरा अपना , बच्चों की खातिर सहूंगी ..

जब तक बस FORUMS पर यूँ बस बात मेरी की जायेगी ...
जब तक हर दिल में इज्जत और आग नहीं लग पाएगी ..

तब तक बोलो कैसे मैं कैसे उस शीशे से बाहर आउंगी ?
तब तक बोलो कैसे मैं सितारों में चमक पाउंगी ?

Monday, July 23, 2012

आंसू और मैं


मैं आंसुओं से बात करता ..
पूछता अरदास करता ..
क्यूँ निकलते यूँ अचानक ?
वक़्त की तौहीन करते !

मैं रोकता मैं टोकता ..
मैं नोचता ...मैं सोखता ..
पर वो नहीं रुकते कभी ...
हुक्म की तामील करते !

पर एक आंसू रुक गया ..
उस दिन पलकों की छाँव में ..
फिर वही चौपाल बैठी ..
पुराने उस गाँव में ..|

कहने लगा वो चमककर ..
बह रहा हूँ मैं इधर ...
तेरे बस से क्यूँ बहूँ ...
जब तू इक पत्थर बना |

तू देखता बच्चा कोई ..
सड़क पर कटोरा लिए ...
या तो तू कुछ झिड़कता है ..
या तो कुछ कहता नहीं ..
और मैं भी अब बहता नहीं |

तू देखता किसान तेरा ...
खाना खिलाकर खुद को मारता है ..
और फिर TV ऑन करता तू शान से ..
सरकार को बस झाड़ता है |
मैं बाहर आने को मचलता फिर से ..
तू गर्भ में मुझको मारता है |


पानी में जहर मिल गया है ..
वो परेशान है कैसे पिए !
तू भी परेशान है अपने कुत्ते के लिए ...
बिना PEDIGREE वो कैसे जिए !
अब जब इंसान की ये बात है 
तो फिर बता मेरी क्या बिसात है ?

ऐसा नहीं कि मैं अब नहीं निकलता ...
बस आधुनिक प्रेमियों की आँखों में रहता हूँ ...
बिस्मिल और सुखदेव की नहीं ...
शायद देश अब आजाद है !
पर फिर गुलामी सा महसूस होता ...
और मैं सैलाब सा भर जाता हूँ |

पता नहीं कैसी आजादी है ..
जहां आधे लोग भूखे मर रहे हैं ..
चंद शासन चला रहे हैं ..
चंद करोडपति बन रहे हैं ..
मैं इसलिए निकलता हूँ ...
मैं इसलिए फिसलता हूँ |

और आज मेरे सब्र की इम्तिहाँ हो गयी है ..
हर एक के लिए मैं खुद को लुटा रहा हूँ ..
लेकिन शायद मैं कम पद जाऊं ..
कुछ हालात की कुछ मेरी कमी है !
अब चलता हूँ मैं ...
फिसलता हूँ मैं ...
तेरा AC कहीं मुझे सुखा न दे !

आंसू चला गया फिर ...
सोचने को मजबूर करता ...
फिर भारत की बात होती ...
खुद से मुझको दूर करता ...

लेकिन ये तो बुलबुला है ...शायद ..
थोड़ी देर में फूट जाएगा ...
आंसुओं का क्या ? पानी ही तो है ..
क्या हुआ जो उनका दिल टूट जाएगा !

और मेरी तरह ही सब सोचते हैं ...
मेरे देश की क्या रवानी है ..
सबकी अपनी कहानी है ..
सबकी अपनी जवानी है |

न फरक पड़ता तुझे ..
और न फरक पड़ता मुझे ...
आंसू और जीवन का क्या है ?
कभी जले कभी बुझे !

फिर भी अगर कसक बची हो दिल में तो ..
चार आंसू तुम भी बहा लेना ...
घर से निकल अपनी गली में कहीं ..
चार आंसू तुम भी मिटा देना |

Thursday, June 7, 2012

भुट्टा

मेरे देश का भविष्य ..एक  बच्चा ..
मेरे घर के बाहर रहता है ..
पीछे वाली गली में एक फटी सी टाट पर बैठता ..
भुट्टे ले लो ..भुट्टे ले लो ...
कहता है !

अंगीठी में सिंक रहा भुट्टा ..
अपने साथ बचपन भी सेंक रहा है ..
सुनहरे दाने काले हो रहे हैं ..
सपनो की तरह उनके ..
और वो अनजाने में उनको फेंक रहा है |

पास में उसकी बहन बैठती है ..
चेहरा गोरा है पर हाथ काले हो गए हैं ..
चप्पल टूट गया था उसके पिछले महीने 
अब पैरों में छाले हो गए हैं |

उन पांच रुपयों में भुट्टा नहीं बिक रहा ..
दो  जिंदगियां बिक रही हैं  ..
फिर भी कार में आते उस 'कपल' को ...
भुट्टे में रंगीनियाँ दिख रही हैं |

क्या हमारा एहसास मर गया है ..
जो हमें कभी दर्द नहीं होता ?
या भुट्टे बेचने वाला वो बच्चा SUPERHUMAN है ..
जिसको गर्म  नहीं होता ..जिसको सर्द नहीं होता !

आजकल सबको 'स्वतंत्रता' चाहिए..
ओह सॉरी ! LIBERTY चाहिए ..
हर कोई अपने आप में यहाँ FORMAL है ..
एक झलक देखकर भुट्टा सेकते हाथों को ..
लगता सबको ..ये तो NORMAL है ..

प्रश्न तो फिर भी मेरी तरह पूछने वाले बहुत हैं ..
उत्तर की तलाश लेकिन कम ही लोग करते हैं ..
हर गली में एक भुट्टे बेचता बच्चा रहता है ..
हर गली में इंसान भावशून्य हो मरते हैं |

सरकार खुश होकर बताती है ..
RTE आ गया है ..अब देश अपना फलेगा 
मैंने भी गर्व से पुछा उसको ..
स्कूल क्यूँ नहीं जाते ?
खिसियाके वो बोला ..घर कैसे चलेगा ?

उत्तर तो मेरे पास नहीं था ..
न उनके पास जो कल देश चलाएंगे ...
वो फिर से भुट्टे बेचेगा ..
और तमाम  रिपोर्टों में हम ..
 DEMOGRAPHIC DIVIDEND लिख आयेंगे |